1 हे आकाश, कान लगा, कि मैं बोलूं; और हे पृय्वी, मेरे मुंह की बातें सुन।।
2 मेरा उपकेश मेंह की नाईं बरसेगा और मेरी बातें ओस की नाईं टपकेंगी, जैसे कि हरी घास पर फीसी, और पौधोंपर फडिय़ां।।
3 मैं तो याहोवा नाम का प्रचार करूंगा। तुम अपके परमेश्वर की महिमा को मानो!
4 वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उस में कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है।।
5 परन्तु इसी जाति के लोग टेढ़े और तिर्छे हैं; थे बिगड़ गए, थे उसके पुत्र नहीं; यह उनका कलंक है।।
6 हे मूढ़ और निर्बुद्धि लोगों, क्या तुम यहोवा को यह बदला देते हो? क्या वह तेरा पिता नहीं है, जिस ने तुम को मोल लिया है? उस ने तुम को बनाया और स्यिर भी किया है।।
7 प्राचीनकाल के दिनोंको स्मरण करो, पीढ़ी पीढ़ी के वर्षोंको विचारो; अपके बाप से पूछो, और वह तुम को बताएगा; अपके वृद्ध लोगोंसे प्रश्न करो, और वे तुझ से कह देंगे।।
8 जब परमप्रधान ने एक एक जाति को निज निज भाग बांट दिया, और आदमियोंको अलग अलग बसाया, तब उस ने देश देश के लोगोंके सिवाने इस्राएलियोंकी गिनती के अनुसार ठहराए।।
9 क्योंकि यहोवा का अंश उसकी प्रजा है; याकूब उसका नपा हुआ निज भाग है।।
10 उस ने उसको जंगल में, और सुनसान और गरजनेवालोंसे भरी हुई मरूभूमि में पाया; उस ने उसके चंहु ओर रहकर उसकी रझा की, और अपक्की आंख की पुतली की नाई उसकी सुधि रखी।।
11 जैसे उकाब अपके घोंसले को हिला हिलाकर अपके बच्चोंके ऊपर ऊपर मण्डलाता है, वैसे ही उस ने अपके पंख फैलाकर उसको अपके परोंपर उठा लिया।।
12 यहोवा अकेला ही उसकी अगुवाई करता रहा, और उसके संग कोई पराया देवता न या।।
13 उस ने उसको पृय्वी के ऊंचे ऊंचे स्यानोंपर सवार कराया, और उसको खेतोंकी उपज खिलाई; उस ने उसे चट्टान में से मधु और चकमक की चट्ठान में से तेल चुसाया।।
14 गायोंका दही, और भेड़-बकरियोंका दूध, मेम्नोंकी चर्बी, बकरे और बाशान की जाति के मेढ़े, और गेहूं का उत्तम से उत्तम आटा भी; और तू दाखरस का मधु पिया करता या।।
15 परन्तु यशूरून मोटा होकर लात मारने लगा; तू मोटा और ह्रृष्ट-पुष्ट हो गया, और चर्बी से छा गया है; तब उस ने अपके सृजनहार ईश्वर को तज दिया, और अपके उद्धारमूल चट्टान को तुच्छ जाना।।
16 उन्होंने पराए देवताओं को मानकर उस में जलन उपजाई; और घृणित कर्म करके उसको रिस दिलाई ।।
17 उन्होंने पिशाचोंके लिथे जो ईश्वर न थे बलि चढ़ाए, और उनके लिथे वे अनजाने देवता थे, वे तो नथे नथे देवता थे जो योड़े ही दिन से प्रकट हुए थे, और जिन से उनके पुरखा कभी डरे नहीं।
18 जिस चट्टान से तू उत्पन्न हुआ उसको तू भूल गया, और ईश्वर जिस से तेरी उत्पत्ति हुई उसको भी तू भूल गया है।।
19 इन बातोंको देखकर यहोवा ने उन्हें तुच्छ जाना, क्योंकि उसके बेटे-बेटियोंने उसे रिस दिलाई यी।।
20 तब उस ने कहा, मैं उन से अपना मुख छिपा लूंगा, और देखूंगा कि उनका अन्त कैसा होगा, क्योंकि इस जाति के लोग बहुत टेढ़े हैं और धोखा देनेवाले पुत्र हैं।
21 उन्होंने ऐसी वस्तु मानकर जो ईश्वर नहीं हैं, मुझ में जलन उत्पन्न की; और अपक्की व्यर्य वस्तुओं के द्वारा मुझे रिस दिलाई। इसलिथे मैं भी उनके द्वारा जो मेरी प्रजा नहीं हैं उनके मन में जलन उत्पन्न करूंगा; और एक मूढ़ जाति के द्वारा उन्हें रिस दिलाऊंगा।।
22 क्योंकि मेरे कोप की आग भड़क उठी है, जो पाताल की तह तक जलती जाएगी, और पृय्वी अपक्की उपज समेत भस्म हो जाएगी, और पहाड़ोंकी नेवोंमें भी आग लगा देगी।।
23 मैं उन पर विपत्ति पर विपत्ति भेजूंगा; और उन पर मैं अपके सब तीरोंको छोडूंगा।।
24 वे भूख से दुबले हो जाएंगे, और अंगारोंसे और कठिन महारोगोंसे ग्रसित हो जाएंगे; और मैं उन पर पशुओं के दांत लगवाऊंगा, और धूलि पर रेंगनेवाले सर्पोंका विष छोड़ दूंगा।।
25 बाहर वे तलवार से मरेंगे, और कोठरियोंके भीतर भय से; क्या कुंवारे और कुंवारियां, क्या दूध पीता हुआ बच्चा क्या पक्के बालवाले, सब इसी प्रकार बरबाद होंगे।
26 मैं ने कहा या, कि मैं उनको दूर दूर से तित्तर-बित्तर करूंगा, और मनुष्योंमें से उनका स्मरण तक मिटा डालूंगा;
27 परन्तु मुझे शत्रुओं की छेड़ छाड़ का डर या, ऐसा न हो कि द्रोही इसको उलटा समझकर यह कहने लगें, कि हम अपके ही बाहुबल से प्रबल हुए, और यह सब यहोवा से नहीं हुआ।।
28 यह जाति युक्तहीन तो है, और इन में समझ है ही नहीं।।
29 भला होता कि थे बुद्धिमान होते, कि इसको समझ लेते, और अपके अन्त का विचार करते!
30 यदि उनकी चट्टान ही उनको न बेच देती, और यहोवा उनको औरोंके हाथ में न कर देता; तो यह क्योंकर हो सकता कि उनके हजार का पीछा एक मनुष्य करता, और उनके दस हजार को दो मनुष्य भगा देते?
31 क्योंकि जैसी हमारी चट्टान है वैसी उनकी चट्टान नहीं है, चाहे हमारे शत्रु ही क्योंन न्यायी हों।।
32 क्योंकि उनकी दाखलता सदोम की दाखलता से निकली, और अमोरा की दाख की बारियोंमें की है; उनकी दाख विषभरी और उनके गुच्छे कड़वे हैं;
33 उनका दाखमधु सांपोंका सा विष और काले नागोंका सा हलाहल है।।
34 क्या यह बात मेरे मन में संचित, और मेरे भण्डारोंमें मुहरबन्द नहीं है?
35 पलटा लेना और बदला देना मेरा ही काम है, यह उनके पांव फिसलने के समय प्रगट होगा; क्योंकि उनकी विपत्ति का दिन निकट है, और जो दुख उन पर पड़नेवाले है वे शीघ्र आ रहे हैं।।
36 क्योंकि जब यहोवा देखेगा कि मेरी प्रजा की शक्ति जाती रही, और क्या बन्धुआ और क्या स्वाधीन, उन में कोई बचा नहीं रहा, तब यहोवा अपके लोगोंका न्याय करेगा, और अपके दासोंके विषय में तरस खाएगा।।
37 तब वह कहेगा, उनके देवता कहां हैं, अर्यात वह चट्टान कहां जिस पर उनका भरोसा या,
38 जो उनके बलिदानोंकी चर्बी खाते, और उनके तपावनोंका दाखमधु पीते थे? वे ही उठकर तुम्हारी सहाथता करें, और तुम्हारी आड़ हों!
39 इसलिथे अब तुम देख लो कि मैं ही वह हूं, और मेरे संग कोई देवता नहीं; मैं ही मार डालता, और मैं जिलाता भी हूं; मैं ही घायल करता, और मैं ही चंगा भी करता हूं; और मेरे हाथ से कोई नहीं छुड़ा सकता।।
40 क्योंकिं मैं अपना हाथ स्वर्ग की ओर उठाकर कहता हूं, क्योंकि मैं अनन्त काल के लिथे जीवित हूं,
41 सो यदि मैं बिजली की तलवार पर सान धरकर फलकाऊं, और न्याय को अपके हाथ में ले लूं, तो अपके द्रोहियोंसे बदला लूंगा, और अपके बैरियोंको बदला दूंगा।।
42 मैं अपके तीरोंको लोहू से मतवाला करूंगा, और मेरी तलवार मांस खाएगी वह लोहू, मारे हुओं और बन्धुओं का, और वह मांस, शत्रुओं के प्रधानोंके शीश का होगा।।
43 हे अन्यजातियों, उसकी प्रजा के साय आनन्द मनाओ; क्योंकि वह अपके दासोंके लोहू का पलटा लेगा, और अपके द्रोहियोंको बदला देगा, और अपके देश और अपक्की प्रजा के पाप के लिथे प्रायश्चित देगा।
44 इस गीत के सब वचन मूसा ने नून के पुत्र होशे समेत आकर लोगोंको सुनाए।
45 जब मूसा थे सब वचन सब इस्राएलियोंसे कह चुका,
46 तब उस ने उन से कहा कि जितनी बातें मैं आज तुम से चिताकर कहता हूं उन सब पर अपना अपाना मन लगाओ, और उनके अर्यात् इस व्यवस्या की सारी बातोंके मानने में चौकसी करने की आज्ञा अपके लड़केबालोंको दो।
47 क्योंकि यह तुम्हारे लिथे व्यर्य काम नहीं, परन्तु तुम्हारा जीवन ही है, और ऐसा करने से उस देश में तुम्हारी आयु के दिन बहुत होंगे, जिसके अधिक्कारनेी होने को तुम यरदन पार जा रहे हो।।
48 फिर उसी दिन यहोवा ने मूसा से कहा,
49 उस अबारीम पहाड़ की नबो नाम चोटी पर, जो मोआब देश में यरीहो के साम्हने है, चढ़कर कनान देश जिसे मैं इस्राएलियोंकी निज भूमि कर देता हूं उसको देख ले।
50 तब जैसा तेरा भाई हारून होर पहाड़ पर मरकर अपके लोगोंमें मिल गया, वैसा ही तू इस पहाड़ पर चढ़कर मर जाएगा, और अपके लोगोंमें मिल जाएगा।
51 इसका कारण यह है, कि सीन जंगल में, कादेश के मरीबा नाम सोते पर, तुम दोनोंने मेरा अपराध किया, क्योंकि तुम ने इस्राएलियोंके मध्य में मुझे पवित्र न ठहराया।
52 इसलिथे वह देश जो मैं इस्राएलियोंको देता हूं, तू अपके साम्हने देख लेगा, परन्तु वहां जाने न पाएगा।।